(N/A) किसी रेडियोधर्मी पदार्थ की अर्ध-आयु वह समय अंतराल है जिसके दौरान रेडियोधर्मी नाभिकों की संख्या अपने प्रारंभिक मान की आधी हो जाती है।
मान लीजिए $t = 0$ पर नाभिकों की प्रारंभिक संख्या $N_0$ है। एक अर्ध-आयु $T_{1/2}$ के बाद,नाभिकों की संख्या $N$ घटकर $N_0 / 2$ हो जाती है।
रेडियोधर्मी क्षय के नियम के अनुसार:
$N = N_0 e^{-\lambda t}$
$N = N_0 / 2$ और $t = T_{1/2}$ रखने पर:
$\frac{N_0}{2} = N_0 e^{-\lambda T_{1/2}}$
$\frac{1}{2} = e^{-\lambda T_{1/2}}$
दोनों पक्षों का प्राकृतिक लघुगणक $(\ln)$ लेने पर:
$\ln(1/2) = -\lambda T_{1/2}$
$-\ln(2) = -\lambda T_{1/2}$
$\ln(2) = \lambda T_{1/2}$
चूंकि $\ln(2) \approx 0.693$:
$0.693 = \lambda T_{1/2}$
अतः,संबंध इस प्रकार है:
$T_{1/2} = \frac{0.693}{\lambda}$
इस प्रकार,किसी रेडियोधर्मी तत्व की अर्ध-आयु उसके क्षय नियतांक $\lambda$ के व्युत्क्रमानुपाती होती है और यह नमूने में मौजूद नाभिकों की संख्या पर निर्भर नहीं करती है।